Coal India News: देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी, कोल इंडिया लिमिटेड ने अपनी रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) कोशिशों को एक नई दिशा देने का फ़ैसला किया है। कंपनी की योजना 2030 के फाइनेंशियल ईयर तक R&D गतिविधियों में लगभग ₹1,900 करोड़ का निवेश करने की है। इस पहल का मकसद आधुनिक तकनीकों के ज़रिए कोयले के उत्पादन को बढ़ाना, सुरक्षित माइनिंग के तरीकों को बढ़ावा देना और साफ़ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकें विकसित करना है।
Coal India News: Coal India करेगी 1900 करोड़ का निवेश
कोल इंडिया ने 2024-25 वित्त वर्ष के दौरान ‘नेशनल सेंटर फॉर कोल एंड एनर्जी रिसर्च’ (NACCER) की स्थापना की है। सिर्फ़ रिसर्च से आगे बढ़कर, कंपनी अब नई टेक्नोलॉजी के प्रोटोटाइप विकसित करने और उन्हें असल में लागू करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। पिछले एक साल में कंपनी का R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) खर्च भी चार गुना बढ़ गया है। जहाँ 2023-24 फाइनेंशियल ईयर में यह खर्च लगभग ₹61 करोड़ था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर ₹245 करोड़ हो गया। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि कोल इंडिया टेक्नोलॉजी में इनोवेशन और भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों पर गंभीरता से रणनीतिक ध्यान दे रही है।
रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए, कंपनी ने IIT हैदराबाद, IIT मद्रास और IIT (ISM) धनबाद में तीन ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ स्थापित किए हैं। अत्याधुनिक माइनिंग टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी समाधानों पर रिसर्च में तेज़ी लाने के लिए इन सेंटर्स को चरणों में कुल ₹253 करोड़ की वित्तीय सहायता मिलेगी। फिलहाल, कोल इंडिया 19 बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स और 13 पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। इनमें कोयला गैसीफिकेशन, कार्बन कैप्चर, दुर्लभ खनिजों की रिकवरी, पर्यावरण संरक्षण, बंद खदानों का दोबारा इस्तेमाल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 5G टेक्नोलॉजी और आधुनिक माइनिंग सिस्टम जैसे अहम क्षेत्रों में रिसर्च शामिल है।
AI, 5G और Coal Gasification पर होगा बड़ा निवेश
कंपनी ने अपने तकनीकी सहयोग का दायरा वैश्विक स्तर तक बढ़ा लिया है। कनाडा, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख संगठनों के साथ मिलकर कई संयुक्त परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें ECL (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में भूमिगत कोयला गैसीकरण, झांझरा भूमिगत खदान में 5G तकनीक का इस्तेमाल और आधुनिक खनन अनुसंधान शामिल हैं। कोल इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इन निवेशों और नई तकनीकों से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, परिचालन लागत कम होगी, खनन कार्यों की सुरक्षा बेहतर होगी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। कंपनी का लक्ष्य भारतीय कोयला उद्योग को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना और ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप इसे विकसित करना है।
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