Darbhanga News: मैथिली भाषा, साहित्य और संस्कृति को बचाने के मकसद से स्थापित मैथिली साहित्य अकादमी को बंद करना मिथिला की पहचान पर सीधा हमला है। इस घटना से बिहार सरकार की भाषाई उदासीनता और प्रशासनिक विफलता सामने आती है। इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए, आज दरभंगा के इनकम टैक्स चौक पर मिथिला स्टूडेंट यूनियन के नेतृत्व में एक ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया, जहाँ गुस्से का इज़हार करने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया गया।
वही इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष उदय नारायण झा और विश्वविद्यालय अध्यक्ष अनीश चौधरी मौजूद थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र, युवा और मैथिली भाषा प्रेमी इकट्ठा हुए, और इनकम टैक्स चौक पर “नीतीश कुमार मुर्दाबाद”, “मैथिली साहित्य अकादमी तुरंत खोलो” और “मैथिली भाषा का अपमान बंद करो” जैसे नारों से गूंज उठा।
वही अपने संबोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण ने कहा कि मैथिली साहित्य अकादमी 1976 से मैथिली भाषा और साहित्य के संरक्षण के लिए अग्रणी संस्था रही है। यह तथ्य कि यह अकादमी अब बंद है, यह साबित करता है कि राज्य सरकार मिथिला और मैथिली को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा, “संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली भाषा के साथ ऐसा बर्ताव अस्वीकार्य है। यह सिर्फ एक अकादमी का मुद्दा नहीं है, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान का सवाल है।”
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राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष उदय नारायण झा ने कहा कि सरकार जानबूझकर मैथिली साहित्य अकादमी की उपेक्षा कर रही है। न तो पर्याप्त बजट दिया जा रहा है, और न ही अध्यक्ष और कर्मचारियों की नियमित नियुक्तियाँ की जा रही हैं। नतीजतन, अकादमी अब बंद है, जो पूरे मिथिला समाज के लिए शर्मनाक स्थिति है।
विश्वविद्यालय अध्यक्ष अनीश चौधरी ने कहा कि मिथिला स्टूडेंट यूनियन का छात्र और युवा विंग इस अन्याय के खिलाफ सड़कों से लेकर विधानसभा तक लड़ाई लड़ेगा। “मैथिली साहित्य अकादमी सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि हमारी भाषा, इतिहास और आत्म-सम्मान का प्रतीक है। इसके साथ इस तरह की छेड़छाड़ अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
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मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने मांग की कि बिहार सरकार तुरंत मैथिली साहित्य अकादमी को फिर से खोले, एक स्थायी अध्यक्ष और कर्मचारियों की नियुक्ति करे, पर्याप्त बजट आवंटित करे और अकादमी की सभी गतिविधियों को फिर से शुरू करे। मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे चरणबद्ध और बड़े पैमाने पर जन आंदोलन करेंगे, जिसके लिए राज्य सरकार पूरी तरह ज़िम्मेदार होगी।












