Jamshedpur Garbage: जमशेदपुर लंबे समय से देश के एक बड़े इंडस्ट्रियल हब और ‘स्टील सिटी’ के तौर पर जाना जाता रहा है। हालांकि, कुछ इलाकों में साफ़-सफ़ाई, जल-जमाव और कचरा प्रबंधन को लेकर आ रही शिकायतों ने नगर निकायों के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल की बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में जल-जमाव की समस्या हुई, जिसके बाद प्रशासन ने इन निकायों को संवेदनशील इलाकों पर नज़र रखने और नालियों की नियमित सफ़ाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
Jamshedpur Garbage: मानगो में ड्रेनेज और सफाई बनी चुनौती
मांगो नगर निगम इलाके में नालियों की सफ़ाई और पानी की निकासी को लेकर लगातार शिकायतें आ रही हैं। जुलाई में मॉनसून को देखते हुए निगम ने मुख्य नालियों की सफ़ाई और गाद निकालने के लिए एक विशेष अभियान भी चलाया था। निगम के अनुसार सफ़ाई का काम इलाके को अलग-अलग ज़ोन में बांटकर किया गया था।
इसके बावजूद बारिश के दौरान जल-जमाव की समस्या ने ड्रेनेज सिस्टम की प्रभावशीलता पर बहस छेड़ दी। जुलाई में झारखंड हाईकोर्ट में मैंगो इलाके में सड़क और ड्रेनेज के सही इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को लेकर एक शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस शिकायत को मैंगो नगर निगम के समक्ष रखा जाए।
चार निकायों ने कचरा प्रबंधन कंपनी पर मांगी जांच
अगस्त में सफाई व्यवस्था को लेकर एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। आदित्यपुर नगर निगम, मानगो नगर निगम, जुगसलाई नगर परिषद और कपाली नगर परिषद के प्रमुखों ने संयुक्त रूप से Cube Adityapur Waste Management Private Limited की कार्यप्रणाली की जांच की मांग की। चारों निकायों ने राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के निदेशक को पत्र भेजकर कथित अनियमितताओं और सफाई व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच का आग्रह किया।
टेंडर और विकास योजनाओं पर भी उठे सवाल
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने सितंबर में मानगो नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने पुराने ‘शेड्यूल ऑफ़ रेट्स’ (SOR) के आधार पर 55 प्रोजेक्ट्स के लिए टेंडर जारी करने के मामले में प्रधान सचिव से कार्रवाई की मांग की थी। विधायक ने ये आरोप और आपत्तियां उठाई हैं; इन मामलों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
बड़ा सवाल यह जवाबदेही किस की?
जमशेदपुर में साफ़-सफ़ाई और जल-निकासी की स्थिति मिली-जुली है। एक तरफ़ नगर निकाय मॉनसून से पहले नालियों की सफ़ाई और विशेष अभियान चलाने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ जल-जमाव, कूड़ा उठाने और कचरा प्रबंधन को लेकर शिकायतें और जाँच की माँग भी सामने आ रही है।
इस संदर्भ में यह सवाल उठता है कि शहर की सफाई व्यवस्था के लिए बनाई जा रही योजनाओं का ज़मीनी स्तर पर असल में कितना असर होता है और शिकायतों के समाधान के लिए जवाबदेही किस स्तर पर तय की जाती है। आगे चलकर जनता नियमित सफाई, बेहतर जल निकासी और कचरा प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर कड़ी नज़र रखेगी।
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