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Minister Deepak Prakash: क्या जाएगी दीपक प्रकाश की मंत्री कुर्सी?

Minister Deepak Prakash: Will Deepak Prakash lose his ministerial post?
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Minister Deepak Prakash: बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के वरिष्ठ नेता दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद बढ़ता जा रहा है। उनकी दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम ने बिहार के राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

Minister Deepak Prakash:सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब

मीडिया से बात करते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने साफ़ कहा कि वे पहले भी मंत्री थे और अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री पद के बारे में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का नेतृत्व ही अंतिम फ़ैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में मीडिया से पता चला और नोटिस मिलने के बाद उसे पढ़ने के बाद ही वे उचित जवाब देंगे।

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में 7 मई, 2026 को दीपक प्रकाश की दोबारा नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने दावा किया है कि यह नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) की भावना और प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

संविधान के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने बिना मंत्री नियुक्त किया जाता है, तो उनके लिए छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना ज़रूरी है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन्हें मंत्री का पद छोड़ना होगा।

याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश को 20 नवंबर, 2025 को मंत्री नियुक्त किया गया था। उस समय, वे न तो विधानसभा के सदस्य थे और न ही विधान परिषद के। संविधान के अनुसार, उन्हें छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना ज़रूरी था, लेकिन वे तय समय-सीमा के अंदर सदस्यता हासिल नहीं कर पाए।

याचिकाकर्ता का कहना है कि अप्रैल 2026 में राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मंत्रिपरिषद भंग कर दी गई थी। इसके बाद, 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और नई सरकार का गठन हुआ। इस दौरान, दीपक प्रकाश लगभग 22 दिनों तक मंत्री पद पर नहीं रहे।

SC नोटिस के बाद बढ़ी सियासी हलचल

इसके बाद, 7 मई 2026 को उन्हें फिर से पंचायती राज मंत्री नियुक्त किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि थोड़े समय के अंतराल के बाद किसी ऐसे व्यक्ति को मंत्री के तौर पर फिर से नियुक्त करना जो विधायक नहीं है, संविधान की मूल भावना को दरकिनार करने की कोशिश है। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह घोषणा करने की मांग की है कि यह नियुक्ति असंवैधानिक है।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस मामले का फैसला बिहार की राजनीति और गैर-विधायक मंत्रियों की नियुक्ति से जुड़े भविष्य के मामलों पर बड़ा असर डाल सकता है।

अब सबकी नज़रें बिहार सरकार, मंत्री दीपक प्रकाश और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने वाले जवाब पर टिकी हैं। इस मामले में होने वाली अगली सुनवाई बिहार की राजनीति के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है।

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