Modi Cabinet Expansion: नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में लंबे समय से चर्चा में रहे कैबिनेट फेरबदल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से लौटने के बाद मंगलवार को मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव की घोषणा की जा सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। खबर है कि इस फेरबदल में कैबिनेट में कई नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की संभावना है। राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाने के मकसद से किए जा रहे इस फेरबदल को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है।
Modi Cabinet Expansion: धर्मेंद्र प्रधान समेत कई मंत्रियों को लेकर अटकलें
कैबिनेट विस्तार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर सबसे ज़्यादा अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, NDA ने उनके भविष्य को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी के विभागों में संभावित बदलाव को लेकर भी अटकलें तेज़ हैं। वहीं, राजनीतिक गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मंत्रालयों में संभावित फेरबदल की चर्चा भी चल रही है।
नए सहयोगी दलों को मिल सकती है मंत्रिमंडल में जगह
सूत्रों से पता चलता है कि NDA का समर्थन करने वाली कुछ पार्टियों के नेताओं को भी जल्द ही कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। इस बीच, BJP और उसके सहयोगियों के कई नेताओं के नाम संभावित नए चेहरों के तौर पर सामने आ रहे हैं। जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें अरुण गोविल, श्रीकांत शिंदे, RBI के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास, VD शर्मा, तरुण चुघ और राघव चड्ढा शामिल हैं। हालांकि, सरकार या संबंधित पार्टियों की ओर से इन नामों के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पीएम मोदी के व्यस्त कार्यक्रम के बीच तय हो रही टाइमिंग
कैबिनेट में फेरबदल का समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है। प्रधानमंत्री 27 से 29 जून तक विदेश दौरे पर हैं और जुलाई के पहले और दूसरे हफ़्ते में भी कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम तय हैं। इस बीच, संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होने वाला है। इन हालात को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार संसद सत्र से पहले मंत्रिपरिषद का पुनर्गठन करके एक नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
राजनीतिक और क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा फोकस
सूत्रों के अनुसार, संभावित फेरबदल के दौरान क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक और जातीय संतुलन, और आगामी विधानसभा चुनावों जैसे कारकों पर विचार किया जा सकता है। कुछ मंत्रालयों से जुड़ी जिम्मेदारियों में बदलाव करके प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के प्रयास भी किए जा सकते हैं। हालांकि, जब तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की जाती, तब तक सभी नाम और संभावित बदलाव केवल अटकलें ही हैं। अब सबकी निगाहें मंगलवार को होने वाली संभावित घोषणा पर टिकी हैं।
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