Rajya Sabha Election: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) द्वारा बैद्यनाथ राम को राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित करने के बाद पार्टी में उत्साह का माहौल है. उम्मीदवार की घोषणा के तुरंत बाद रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पर झामुमो विधायकों और सांसदों की एक अनौपचारिक बैठक हुई, जिसमें राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा की गई.
बैठक में झारखंड से राज्यसभा सांसद महुआ माजी, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, हफीजुल हसन अंसारी, विधायक डॉ. स्टीफन मरांडी, सचेतक मथुरा प्रसाद महतो, विधायक राम सूर्य मुंडा, विधायक विकास सिंह मुंडा, विधायक सोमेश चंद्र सोरेन समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. बैठक में राज्यसभा के लिए घोषित उम्मीदवार बैद्यनाथ राम भी शामिल हुए.
Rajya Sabha Election: बैद्यनाथ राम की जीत की बनी रणनीति
मुलाकात के दौरान बैद्यनाथ राम ने पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि झामुमो ने उन्हें जो सम्मान और विश्वास दिया है, उसे वह कभी नहीं भूल सकते. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन पर भरोसा जताकर उन्हें अपना कर्जदार बना लिया है.
सूत्रों के मुताबिक बैठक में राज्यसभा चुनाव में झामुमो प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने को लेकर रणनीति तैयार की गयी. नेताओं ने एकजुट होकर बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजने का संकल्प दोहराया. इसके साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने प्रत्याशी को बधाई देते हुए केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया.
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पार्टी नेतृत्व के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाने का फैसला उन लोगों को जवाब है जो झामुमो को परिवार आधारित पार्टी बताकर इसकी आलोचना करते रहे हैं.
बैद्यनाथ राम को मिला नेताओं का समर्थन -महुआ माजी
महुआ माजी ने कहा कि बैद्यनाथ राम एक अनुभवी और जमीनी स्तर के नेता हैं जिन्हें झारखंड की समस्याओं और लोगों की अपेक्षाओं की गहरी समझ है. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्यसभा पहुंचकर वे झारखंड के मुद्दों को संसद में सशक्त और प्रभावी तरीके से उठायेंगे.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाकर झामुमो ने एक सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. इस फैसले के जरिए पार्टी संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं और नेताओं को आगे बढ़ाने का भी संकेत दे रही है. राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में सरगर्मियां तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति और स्पष्ट होने की संभावना है.
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