National Institute of Technology Patna: मात्र पेयजल की उपलब्धता काफी नहीं है बल्कि हर घर तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो, यह भी जरूरी है। इसी सोच के साथ एनआईटी पटना में “स्वच्छ शहरी जलापूर्ति” विषय पर वर्कशॉप का आयोजन किया गया। वाटर एड इंडिया के सहयोग से आयोजित इस वर्कशॉप की शुरुआत नगर विकास एवं आवास विभाग के चीफ इंजीनियर निखिल कुमार के संबोधन से हुआ। उन्होंने जानकारी दी कि हर घर नल का जल निश्चय में बिहार सरकार ने 70% से अधिक शहरी परिवारों को नल का जल उपलब्ध करा दिया है। अगले 2 साल में यह शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि केवल जल उपलब्ध कराना मकसद नहीं है बल्कि निर्बाध तरीके से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना लक्ष्य है। पेयजल संकट से प्रभावित राजगीर, नवादा, गया और बोधगया शहरी निकाय में नियमित और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित किया गया है।
रिसर्च के लिए आगे आना होगा
बता दें कि यह स्टेट एडवोकेसी वर्कशॉप था, जिसका थीम था – शहरी क्षेत्र में इफेक्टिव क्लोरिनेशन, योजना, चुनौतियां और तकनीकी समाधान। दूसरे वक्ता के तौर पर बुडको के मुख्य महाप्रबंधक रामाशंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार ने पेयजल को सुशासन के कार्यक्रम में शामिल कर एक बड़ा निवेश किया है। राज्य के 45000 से अधिक योजनाओं को नगर निकायों ने निर्मित किया है। इन योजनाओं में क्लोरिनेशन एक चुनौती है हमें पेयजल को शुद्ध बनाने के उपाय में इनोवेशन की जरूरत है। पंप ऑपरेटर को प्रयोगशाला के केमिस्ट नहीं समझना चाहिए। तकनीकी रूप से कर कुशलता और बेहतर लक्ष्य निर्धारण हेतु एनआईटी और आईआईटी जैसे संस्थानों को अनुसंधान और शोध में आगे आना चाहिए।
क्लोरिनेशन एक महत्वपूर्ण प्रॉसेस
पीएचईडी के चीफ इंजीनियर राम चंद्र पाण्डेय ने पेयजल में अशुद्धियो और इसके शुद्धिकरण के बारे में चर्चा की। उन्होंने राज्य के ग्रामीण क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था पर बोलते हुए बताया कि हमने ग्राउंडवाटर में आर्सेनिक फ्लोराइड आयरन आदि प्रदूषण को शुद्ध कर पानी उपलब्ध करा रहे हैं लेकिन बैक्ट्रोलॉजिकल संक्रमण अभी भी एक चुनौती है। क्लोरिनेशन एक महत्वपूर्ण प्रॉसेस है जिसे हर हाल में सुनिश्चित करना होगा। इससे पहले अपने वेलकम ऐड्रेस में एनआईटी पटना के सिविल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉक्टर एन एस मौर्य ने कहां कि यह एक महत्वपूर्ण अवसर है जब हम शिक्षण संस्थान, सरकार और सरकार की सहयोगी संस्थाएं एक साथ पीने के लिए शुद्ध पानी पर चर्चा के लिए जुटे हैं।
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डायरिया डेथ में कमी आई
अगले तकनीकी सत्र में पीएचईडी विभाग, (बिहार सरकार) के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर डी के चतुर्वेदी ने कहा की वाटर सप्लाई में तीन चीज सबसे महत्वपूर्ण है -क्वालिटी, क्वांटिटी और रेगुलेटरी। यानी क्वालिटी वाटर सप्लाई नियमित रूप से घर-घर तक पहुंचाना। उन्होंने भी जोर दिया कि पेयजल में अशुद्धियों की सबसे बड़ी समस्या बैक्टीरियल कॉन्टेमिनेशन है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 2019 के बाद से बिहार में डायरिया डेथ में बहुत कमी आई है। इसका बहुत बड़ा कारण क्लोरिनेशन के माध्यम से घर-घर तक शुद्ध जल पहुंच सुनिश्चित कराना है। डेथ का एक बड़ा कारण बैक्टीरिया कॉन्टेमिनेशन है। इसमें सुधार के लिए क्लोरिनेशन बहुत महत्वपूर्ण है। अंत में, उन्होंने बताया कि शुद्ध पेयजल नल के माध्यम से घर-घर तक पहुंचने से लोग अब आर्थिक कार्यों में अधिक समय दे पा रहे हैं और महिलाएं भी सम्मानजनक जिंदगी जी रही हैं।
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इंदौर की घटना सबक
पीएचईडी विभाग, (बिहार सरकार) के रिटायर्ड इंजीनियर दिनेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि इंदौर की हाल की घटना हम सभी के लिए एक बड़ा सबक है। क्लोरिनेशन को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। साथ ही वाटर सप्लाई के लिए जो पॉलिसी निश्चित है उसका समुचित रूप से पालन किया जाना चाहिए। इससे पहले उद्घाटन सत्र की शुरुआत में वॉटर एड इंडिया के स्टेट प्रोग्राम डायरेक्टर संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सुल्तानगंज नगर परिषद और अकबरनगर नगर पंचायत में वॉटर एड इंडिया ने पेजलापूर्ति के आदर्श मानक स्थापित करने की कोशिश की है। वर्कशॉप में आईआईटी बीएचयू से डॉ प्रभात कुमार सिंह, यूनिसेफ से अटल बिहारी शुक्ला, डॉ सुरभि समेत अन्य वक्ताओं ने भी अपने एक्सपीरियंस शेयर किया।












