JEE Advanced 2026: कहते हैं कि अगर हौसला बुलंद हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो आर्थिक तंगी भी सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बनती। बिहार के दरभंगा जिले के बहेरी ब्लॉक के सोनम गांव के 17 वर्षीय अभिनव अजय ने इस कहावत को सच साबित कर दिया है। 2026 के जेईई एडवांस्ड में 791वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल करके उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि अपने संस्थान और पूरे मिथिला क्षेत्र का नाम रोशन किया है। अब उनका सपना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में दाखिला लेकर इंजीनियर बनना है।
JEE Advanced 2026: पिता गांव-गांव घूमकर करते हैं काम
अभिनव के पिता अजय कुमार आरओ वाटर मशीनें ठीक करते हैं। वे गांव-गांव और शहर घूम-घूमकर मशीनें ठीक करते हैं और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आमदनी के कारण उनके परिवार के लिए बेटे की शिक्षा और कोचिंग का खर्च उठाना आसान नहीं था। इसके बावजूद, उन्होंने कभी अपने बेटे के सपनों को मरने नहीं दिया। बेटे की सफलता पर भावुक हुए अजय कुमार ने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण वे हमेशा अपने बेटे को बेहतर शिक्षा दिलाने को लेकर चिंतित रहते थे।
उन्होंने बताया कि एक दिन वे RO मशीन ठीक करने के लिए ओमेगा स्टडी सेंटर पहुंचे थे। वहां बच्चों को पढ़ते देख उनके मन में इच्छा हुई कि उनका बेटा भी यहां पढ़े, लेकिन बेटे की पढ़ाई बात कर, आर्थिक परेशानी के कारण वे अपने पुत्र का दाखिला नहीं करवा सके। बाद में जब संस्थान के डायरेक्टर सुमित चौबे को अभिनव के बारे में जानकारी लगी, तो उन्होंने आगे बढ़कर अभिनव की पढ़ाई की जिम्मा लिया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती और लगनशील रहा है। आज उसकी सफलता से पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अभिनव आगे भी इसी तरह मेहनत करता रहेगा और अपने सभी सपनों को पूरा करेगा।
आर्थिक तंगी नहीं रोक सकी उड़ान
अभिनव बताते हैं कि सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और उनकी लगातार मेहनत सबसे बड़ी वजह रही। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया और अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखा।
इस सफलता में दरभंगा के ओमेगा स्टडी सेंटर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। आर्थिक तंगी के बावजूद संस्थान के डायरेक्टर सुमित चौबे और उनकी टीम ने अभिनव की पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। उन्होंने फीस को बाधा नहीं बनने दिया और पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षा फॉर्म भरने सहित अन्य जरूरी मदद भी की।
अभिनव की यह सफलता उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक या सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह कहानी बताती है कि यदि परिवार का विश्वास, शिक्षकों का सहयोग और खुद पर भरोसा हो, तो किसी भी मुश्किल को पार कर सफलता हासिल की जा सकती है। दरभंगा के एक छोटे से गांव से निकली यह प्रेरणादायक कहानी आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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