Paras Global Hospital Darbhanga: बिहार के दरभंगा जिले में चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़े एक अहम मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है. आयोग ने अल्लपट्टी स्थित पारस ग्लोबल हॉस्पिटल को सेवा में गंभीर कमी और इलाज में लापरवाही का दोषी मानते हुए पीड़ित परिवार को कुल 33 लाख 20 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है.
Paras Global Hospital Darbhanga: मरीज की मौत पर अस्पताल दोषी करार
यह फैसला जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, दरभंगा के अध्यक्ष पीयूष कमल दीक्षित और सदस्य अरुण कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया. मामला उपभोक्ता वाद संख्या डीसी 195/सीसी/34/2023 से जुड़ा है, जिसमें मरीज की असामयिक मौत के कारण अस्पताल प्रबंधन पर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया गया था.
मामले के अनुसार, खराजपुर निवासी 47 वर्षीय वरुण कुमार झा को तबीयत खराब होने पर छह जनवरी 2023 की रात पारस ग्लोबल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप है कि 7 जनवरी को जांच के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को खतरे से बाहर बताया था. हालांकि, उसी रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और देर रात उनका निधन हो गया।
मौत के बाद जब परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मौत के कारण और इलाज से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. आरोप है कि अस्पताल ने इलाज का पूरा चार्ट भी नहीं दिया और सिर्फ इलाज का बिल थमा दिया. इसके बाद मृतक की पत्नी कल्पना झा, उनके पिता अधिवक्ता कृष्ण कुमार मिश्रा और परिवार के अन्य सदस्यों ने न्याय की मांग को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.
सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण किया. आयोग ने अपने आदेश में माना कि अस्पताल की सेवा में गंभीर त्रुटियां और चिकित्सकीय लापरवाही सामने आई है, जिससे मरीज की असामयिक मौत हो गई.
पारस ग्लोबल अस्पताल पर लाखों का मुआवजा
आयोग ने विभिन्न मदों में मुआवजे की राशि तय की है. इसमें परिवार को वित्तीय क्षति के लिए 28 लाख 80 हजार रुपये, भविष्य की सुरक्षा के लिए 2 लाख 40 हजार रुपये, चिकित्सा व्यय के लिए 1 लाख 10 हजार रुपये, संपत्ति क्षति के लिए 25 हजार रुपये, वैवाहिक क्षति के लिए 40 हजार रुपये, अंतिम संस्कार व्यय के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमेबाजी व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश शामिल है।
इस प्रकार कुल 33 लाख 20 हजार रुपये का मुआवजा तय किया गया है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अस्पताल 45 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर भुगतान नहीं करता है, तो उसे निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ब्याज सहित राशि का भुगतान करना होगा।
पीड़ित परिवार की ओर से वकील मुरारी लाल केवट ने आयोग के फैसले का स्वागत किया और कहा कि लंबे इंतजार के बाद परिवार को न्याय मिला है. इस फैसले को चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी माना जा रहा है. दरभंगा उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय चिकित्सा संस्थानों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जो मरीजों के अधिकारों और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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