Bihar Panchayat Election 2026: राज्य चुनाव आयोग ने बिहार में 2026 में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों के लिए एक ऐतिहासिक और प्रौद्योगिकी आधारित पहल की घोषणा की है। पंचायत चुनावों में पहली बार बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और गर्भवती महिलाओं के लिए ई-वोटिंग की शुरुआत की जा रही है।आयोग का कहना है कि नई प्रणाली का उद्देश्य उन मतदाताओं को राहत प्रदान करना है जिन्हें मतदान केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। इस निर्णय को बिहार के ग्रामीण लोकतंत्र को अधिक समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Bihar Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव में बड़ा बदलाव
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, पंचायत चुनावों में जिला परिषद सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच के पदों के लिए मतदान होगा। इस बार 80 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाता और गर्भवती महिलाएं ई-वोटिंग सुविधा का लाभ उठा सकेंगी। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर कुल पात्र मतदाताओं में से केवल 30 प्रतिशत को ही यह सुविधा प्रदान की जाएगी। आयोग का मानना है कि इससे व्यवस्था का दुरुपयोग रोका जा सकेगा और यह सुनिश्चित होगा कि यह सुविधा केवल जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।
ई-वोटिंग सुविधा का लाभ उठाने के लिए इच्छुक मतदाताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है। पात्रता की जांच और सत्यापन का दायित्व बीएलओ, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपा गया है। ये कार्यकर्ता घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे और पात्र मतदाताओं की सूची तैयार करेंगे। सूची का सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित मतदाता को ई-वोट डालने की अनुमति दी जाएगी।
इन लोगों को मिलेगी E-Voting सुविधा
राज्य चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया है। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि गलत जानकारी देकर ई-वोटिंग का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी आवेदनों की गहन जांच की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या धोखाधड़ी न हो।
इस बीच, आयोग ने 2021 के पंचायत चुनावों से संबंधित पुराने चुनावी दस्तावेजों को नष्ट करने के निर्देश भी जारी किए हैं। इस संबंध में सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र भेजा गया है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, मतदाता सूचियां, मतदान रजिस्टर और अन्य चुनावी रिकॉर्ड नियमों के अनुसार और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ नष्ट किए जाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
यह भी पढ़ें: पटना में TRE-4 प्रदर्शन पर लाठीचार्ज, छात्र नेता दिलीप कुमार गिरफ्तार
राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिहार में यह ई-वोटिंग प्रणाली सफल होती है, तो इसे भविष्य में अन्य चुनावों में भी लागू किया जा सकता है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए काफी राहत साबित हो सकती है।















