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Navratri Special: इस मंदिर में क्यों नहीं जा सकतीं महिलाएं गर्भगृह में? जानिए बड़ा कारण

Navratri Special: इस मंदिर में क्यों नहीं जा सकतीं महिलाएं गर्भगृह में?
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Navratri Special: वासंतिक नवरात्रि की शुभ शुरुआत गुरुवार से हो रही है। इसके साथ ही बिहार और झारखंड के कई जिलों में देवी मंदिरों में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का माहौल गहरा गया है। वही नालंदा जिले के देवी मंदिरों में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ देवी भगवती की पूजा का नौ दिन का अनुष्ठान शुरू हो गया हैं । इस बीच, जिले के प्रमुख शक्ति मंदिरों में से एक घोसरावां स्थित मां आशापुरी मंदिर ने भी नवरात्रि की खास तैयारियां की गई हैं।

घोसरावां स्थित मां आशापुरी मंदिर

यह अपनी पुरानी परंपराओं, तांत्रिक साधनाओं, अनोखी धार्मिक मान्यताओं और चमत्कारी आस्था के लिए दूर-दूर तक मशहूर है। यहां देवी सिद्धिदात्री विराजमान हैं और उनकी आठ भुजाओं वाली दिव्य मूर्ति भक्तों की गहरी श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है। 350 साल पुराना यह शक्तिपीठ आज भी नवरात्रि के दौरान भक्तों की श्रद्धा का खास केंद्र बन जाता है।

बिहार शरीफ से लगभग 16 किलोमीटर और पावापुरी जल मंदिर से चार किलोमीटर दूर मौजूद यह मंदिर अपनी अनोखी पूजा पद्धति और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, कई साल पहले यहां एक टीले पर देवी आशापुरी की मूर्ति प्रकट हुई थी, जिसके बाद यह जगह दूर-दूर तक मशहूर हो गई। तब से यह मंदिर भक्तों के लिए अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की एक खास जगह बना हुआ है।

Navratri Special: कलश स्थापना कब होगा

पंडित रविरंजन कुमार ने बताया कि गुरुवार सुबह 6:40 बजे के बाद शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही देवी भगवती के पहले रूप मां शैलपुत्री की पूजा के साथ वासंतिक नवरात्रि की रस्मों की शुरुआत होगी।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन पूरे रीति-रिवाजों के साथ कलश स्थापना की जाएगी। नौ दिनों तक भक्त मंत्रोच्चार, पाठ, व्रत और भक्ति के ज़रिए देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करेंगे।

Navratri Special: नौ दिनों तक चलेगी विशेष पूजा

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष लालकेश्वर सिंह और सचिव सुशील उपाध्याय ने बताया कि वासंतिक नवरात्रि के मौके पर नौ दिनों तक मंदिर में कई खास धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इस दौरान रोज़ाना सुबह और शाम आरती, दुर्गा सप्तशती का पाठ, भजन-कीर्तन, फूल चढ़ाना और खास पूजा का आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि सिर्फ़ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि आस्था, शक्ति, संयम और भक्ति का एक बड़ा त्योहार है। बड़ी संख्या में भक्त सुख, समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करने के लिए देवी मां के दरबार में आते हैं।

Navratri Special: आठ भुजाओं वाली मूर्ति की सिद्धिदात्री के रूप में की जाती है पूजा

भक्त मंदिर में स्थापित देवी मां आशापुरी की मूर्ति की सिद्धिदात्री के रूप में पूजा करते हैं। उनकी आठ भुजाएं शक्ति, सिद्धि और सुरक्षा का प्रतीक हैं। स्थानीय लोगों का मानना ​​है कि सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यही वजह है कि मंदिर में आम दिनों और खासकर हर मंगलवार को भक्तों की भारी भीड़ लगती है।

शारदीय नवरात्रि के दौरान खास तांत्रिक परंपराएं

देवी मां आशापुरी मंदिर की सबसे अनोखी बात शारदीय नवरात्रि से जुड़ी इसकी परंपरा है। पंडित रवि रंजन के अनुसार, इस दौरान मंदिर में खास तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इसी वजह से, शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक महिलाओं का मंदिर परिसर और गर्भगृह दोनों में जाना मना है। यह परंपरा सालों से चली आ रही है, और स्थानीय लोग इसे देवी माँ की खास भक्ति से जोड़ते हैं।

चैत्र नवरात्रि में मंदिर में एंट्री, लेकिन गर्भगृह में एंट्री मना

चैत्र (वासंतिक) नवरात्रि के दौरान, पूजा का एक अलग रूप होता है। इस नवरात्रि में महिलाओं को मंदिर परिसर में जाने की इजाज़त है, लेकिन नौ दिनों तक गर्भगृह में उनकी एंट्री मना है। भक्त मंदिर परिसर के अंदर जाकर दर्शन और पूजा कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह की मर्यादा और परंपरा के कारण एंट्री पर रोक है। गाँव की महिला मंजू देवी बताती हैं कि यह परंपरा सालों से चली आ रही है, और हम महिलाएँ इसे पूरी श्रद्धा से निभाती आ रही हैं।

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350 साल पुरानी कहानी, आस्था आज भी अटूट

स्थानीय कहानी के अनुसार, देवी माँ की मूर्ति लगभग 350 साल पहले घोसरावां गाँव में एक टीले पर प्रकट हुई थी। इस चमत्कारी घटना के बाद, यहाँ एक मंदिर बनाया गया और तब से यह जगह शक्ति पूजा का एक बड़ा सेंटर बन गई है। मंदिर कमिटी के प्रेसिडेंट लालकेश्वर सिंह और सेक्रेटरी सुशील उपाध्याय बताते हैं कि माँ आशापुरी के मंदिर को “मनौतियों का दरबार” माना जाता है, जहाँ भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं और मुरादें पूरी होने पर धन्यवाद देने के लिए लौटते हैं।

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Navratri Special: आस्था, परंपरा और शक्ति का एक अद्भुत संगम

घोसरावां में माँ आशापुरी मंदिर सिर्फ़ एक धार्मिक जगह ही नहीं है, बल्कि आस्था, परंपरा, तांत्रिक साधनाओं और लोक मान्यताओं का भी एक अनोखा संगम है। अपनी अनोखी मान्यताओं, आठ भुजाओं वाली दिव्य मूर्ति, 350 साल पुरानी कहानी और खास नवरात्रि परंपराओं के साथ, यह मंदिर न सिर्फ़ नालंदा के भक्तों के लिए बल्कि आस-पास के कई इलाकों के भक्तों के लिए भी खास महत्व रखता है।

नालंदा से से संजीव कुमार बिट्टू की रिपोर्ट

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