नई दिल्ली: भारत की संसदीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है, मशहूर पत्रकार से नेता बने Harivansh Narayan Singh ने इतिहास रच दिया है। वे लगातार तीसरी बार राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन चुने गए हैं, और इस बार भी उनका चुनाव पूरी तरह से बिना किसी विरोध के हुआ। क्योंकि विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था, इसलिए आज सुबह 11 बजे उनके चुनाव की औपचारिक घोषणा की गई।
हरिवंश नारायण सिंह के कार्यकाल
हरिवंश नारायण सिंह के लिए यह कार्यकाल कई मायनों में अहम माना जा रहा है। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल, 2026 को खत्म हुआ था। इससे पहले वे जनता दल (यूनाइटेड) से इस पद पर थे, लेकिन इस बार उनका चुनाव एक अलग पॉलिटिकल माहौल में हुआ है, जो उनकी स्वीकार्यता और अनुभव को दिखाता है।
नॉमिनेशन और चुनाव प्रक्रिया
डिप्टी चेयरमैन पद के लिए नॉमिनेशन की आखिरी तारीख 16 अप्रैल, दोपहर 12 बजे तय की गई थी। इस दौरान नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) ने Harivansh Narayan Singh के नाम का प्रस्ताव रखा। राज्यसभा में सदन के नेता जे. पी. नड्डा ने उनके नॉमिनेशन का प्रस्ताव रखा, जिसका MP एस. फांगनन कोन्याक ने समर्थन किया। राज्यसभा सेक्रेटेरिएट को उनके पक्ष में कुल पाँच प्रस्ताव मिले, जिनमें भारतीय जनता पार्टी के कई सीनियर नेताओं के प्रस्ताव भी शामिल थे।
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हालांकि, कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली था, इसलिए राज्यसभा में इस पद के लिए जल्दबाजी करना ठीक नहीं था। इसके बावजूद, विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा, जिससे हरिवंश का बिना किसी विरोध के चुनाव पक्का हो गया।
क्या है अहमियत?
हरिवंश नारायण सिंह (Harivansh Narayan Singh) का लगातार तीसरी बार इस पद पर चुना जाना न केवल एक निजी उपलब्धि है, बल्कि संसदीय प्रक्रियाओं की उनकी मजबूत समझ और सभी पार्टियों के बीच संतुलन बनाए रखने की उनकी क्षमता को भी दिखाता है। उनके अनुभव और निष्पक्ष काम करने के तरीके से उम्मीद जगी है कि वे राज्यसभा के कामकाज में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।


















