Ranchi University: झारखंड की उच्च शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव हो रहा है। राज्य सरकार का उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग रांची विश्वविद्यालय में क्लस्टर प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन इस नई प्रणाली की तैयारी में जुटा है, वहीं शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र संगठनों के बीच विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। क्लस्टर प्रणाली का असर स्नातक प्रवेश प्रक्रिया पर भी पड़ा है और छात्रों को प्रवेश के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. गुरु चरण साहू ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार क्लस्टर प्रणाली को लागू करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि क्लस्टर से संबंधित सभी व्यवस्थाओं और विषयों को पहले अंतिम रूप दिया जाएगा, उसके बाद ही कुलाधिपति पोर्टल खोला जाएगा और प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।
क्लस्टर सिस्टम क्या है?
क्लस्टर प्रणाली उच्च शिक्षा की एक ऐसी प्रणाली है जिसमें विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों को विषय विशेषज्ञता के आधार पर विभाजित किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक कॉलेज को विशिष्ट विषयों के अध्ययन का केंद्र बनाया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, दोरंडा कॉलेज में विज्ञान विषय पढ़ाए जाएंगे। मारवाड़ी कॉलेज को वाणिज्य, अर्थशास्त्र, प्रबंधन और बी.एड. के लिए विकसित किया जाएगा। जेएन कॉलेज, धुर्वा में सामाजिक विज्ञान, मनोविज्ञान, अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत और विधि अध्ययन की पढ़ाई कराई जाएगी। इसके अलावा, राम लखन सिंह यादव कॉलेज और एसएस मेमोरियल कॉलेज में भी विभिन्न विषयों के लिए विशेष केंद्र स्थापित करने की योजना है।
Ranchi University: जानिए क्यों हो रहा हैं विरोध
कॉलेज के कर्मचारियों और छात्र संगठनों ने क्लस्टर प्रणाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। डोरंडा कॉलेज के कर्मचारियों ने काले बैज पहनकर धरना प्रदर्शन किया। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एजेएसयू छात्र संघ ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करके इस प्रणाली का विरोध किया। छात्र संगठनों का कहना है कि इससे छात्रों को अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ाई करनी पड़ेगी, जिससे आर्थिक और व्यावहारिक समस्याएं बढ़ेंगी। वहीं, रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू, डॉ. सुदेश कुमार साहू ने भी इस प्रणाली की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) और क्लस्टर प्रणाली की कार्यप्रणाली अलग-अलग है, इसलिए इन्हें एक साथ लागू करने से छात्रों और शिक्षकों के लिए नई समस्याएं पैदा हो सकती हैं। फिलहाल, छात्र इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि इस विवाद के बीच सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन प्रवेश प्रक्रिया कब शुरू करेंगे।
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